बादामी के गुफा मंदिर - जो है 1500 साल से हमारी संस्कृति की परिचायक

चट्टानों का सीना चीरकर उसे नया जीवन देना, ये एक ऐसा हुनर है जिसे हमने दुनिया को सिखाया।
भारत में आज लगभग 1500 ऐसे स्मारक है जो चट्टानों को तराश कर खड़े किए गए है।

ये संख्या विश्व के अन्य सभी देशों के कुल स्मारकों की संख्या से भी अधिक है, आइए आज आपको ले के चलते है हमारी ऐसी ही एक धरोहर की ओर जो पिछले 1500 सालो से हमारी संस्कृति की महानता की परिचायक है

कर्नाटक राज्य के बागलकोट जिले में स्थित बादामी के गुफा मन्दिर चालुक्य स्थापत्य कला का सहज ही गान करती है, चार गुफाओं का ये समूह एक ही बड़ी चट्टान को तराश कर बनाया गया है, आइए जानते है इनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्य-
  1. इन मंदिरों का निर्माण उत्तर की नागर तथा दक्षिण की द्रविन शैली के मिश्रण से किया गया है।
  2. इन गुफाओं का निर्माण 6 वी शताब्दी में चालुक्य राजा कीर्ति वर्मन तथा उनके भाई मंगलेश प्रथम द्वारा कराया गया ।
  3. इन सभी गुफाओं की संरचना लगभग एक सी है, सबसे अगले भाग में खम्बो पर आधारित एक बरामदा जो कि हमें एक बड़े कक्ष (महामण्डप) में ले जाता है, जो कि खूबसूरती से तराशे गए खम्बो से सजाया गया है, महामण्डप के आगे गर्भगृह है जहां देव की मूर्तियां स्थापित है।
  4. प्रत्येक गुफा का बरामदा और महामण्डप पौराणिक घटनाओं तथा देवी देवताओं की मूर्तियों से सजाया गया है।

गुफाओं का वर्णन

गुफा संख्या 1 - ये सबसे प्राचीन गुफा है जो भगवान शिव को समर्पित है, इस गुफा की दीवारों पर शिव के नटराज रूप के 18 हाथो वाली प्रतिमा उकेरी गई है, यही नहीं भगवान शिव की अलग अलग नृत्य मुद्रा की लगभग 81 प्रतिमाओं को इन दीवारों पर उकेरा गया है, गर्भगृह में प्राचीन शिवलिंग प्रतिष्ठित है।




 गुफा संख्या 2 - ये गुफा भगवान विष्णु को समर्पित है तथा इसका मुख्य आकर्षण भगवान विष्णु के त्रिविक्रम रूप का चित्रण है जिसमें वह प्रथम पग से धरती, दूसरे पग से आकाश तथा उनका तीसरा पग राजा बलि के मस्तक पर है,
इसके अतिरिक्त भगवान विष्णु के वराह तथा कृष्ण अवतार से जुड़े प्रसंगों का भी सजीव चित्रण है, गुफा की छत पर गरुड़ तथा पौराणिक कथाओं का उल्लेख है।



गुफा संख्या 3 - ये सबसे बड़ी तथा सबसे आकर्षक गुफा है जिसकी गहराई लगभग 100 फीट है, आप अंदाजा लगा सकते है कि 100 फीट तक चट्टानों को तोड़ कर फिर उसे सजाना आज से 1500 वर्षों पहले कितना दुष्कर रहा होगा।
यह गुफा भी श्री विष्णु को समर्पित है।
वामन, वराह, नरसिंह अवतार के विभिन्न चित्र दीवारों वा छतों पर उकेरे गए है, कमल पर आसीन ब्रम्हा, शेषनाग पर आसीन विष्णु तथा शिव पार्वती विवाह के प्रसंगों का चित्रण प्रमुख आकर्षण है।
इस गुफा के चित्रों से उस काल के सामाजिक जीवन की भी झलक मिलती है।



गुफा संख्या 4 - ये गुफा अपेक्षाकृत छोटी किन्तु आकर्षक है, ये जैन धर्म के तीर्थंकर पार्श्वनाथ के जीवन पर प्रकाश डालती है, दीवारों की नक्काशी मनमोहक है।



इन गुफाओं के अलावा कुछ दूरी पर एक प्राकृतिक गुफा भी है जहां भगवान बुद्ध की प्रतिमा को स्थापित किया गया है।

बादामी में इन गुफा मंदिरों के अतिरक्त और भी आश्चर्य है जिनके बारे में हम आगे की पोस्ट में बात करेंगे।


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